"ज़ियारत" (Ziyarat) तो आप समझ ही गए, यानि किसी मुक़द्दस हस्ती को सलाम करना और उनके मज़ार पर हाज़िर होने का एहसास करना। लेकिन "नाहिया" (Nahiya) शब्द का क्या मतलब है?
इसे अक्सर रोते हुए या गमगीन आवाज़ में पढ़ा जाता है। मुहर्रम के महीने में और विशेष रूप से आशूरा के दिन इसे पढ़ने का बहुत सवाब (पुण्य) बताया गया है।
: Many channels provide the full Ziyarat with Hindi subtitles , which is excellent for those who prefer listening (Areez) while following the meaning. 💡 User Tip ziyarat e nahiya in hindi
यह इस ज़ियारत का सबसे मार्मिक हिस्सा है। इमाम मेहदी (अ.स.) शब्दों के माध्यम से उस दिन घटी हर पीड़ादायक घटना को जीवंत कर देते हैं। उन्होंने यह वर्णन इस प्रकार किया है मानो वह स्वयं उस समय घटित हो रही हों। इसमें इमाम हुसैन (अ.स.) की प्यास, उनके साथियों की बहादुरी, उनके परिवार (अहल-ए-बैत) पर हुए अत्याचारों, और अंत में कर्बला के मैदान में इमाम हुसैन (अ.स.) के सिर का तन से जुदा होने तक की घटनाओं को बड़े ही विस्तार और गमगीन अंदाज में बयान किया गया है। इस ज़ियारत की एक अनूठी विशेषता यह है कि यह कर्बला के उन शहीदों का नाम लेकर उल्लेख करती है जो अन्य ज़ियारतों में नहीं मिलते।
"Falan dabhoka atshana..." "پس انہوں نے آپ کو پیاسا ذبح کیا۔ آپ کو خاک پر تڑپتا ہوا چھوڑ دیا۔ آپ کے خیموں کو لوٹا گیا اور اہل بیتؑ کو قیدی بنایا گیا۔" امامِ زمانہؑ فرماتے ہیں: Fala abkiyan nalaika sabahan wa masaa
"Lain akhartatnid duhooru... Fala abkiyan nalaika sabahan wa masaa..." "اگرچہ میں زمانے کی دوری کی وجہ سے کربلا میں آپ کے پاس موجود نہ تھا کہ آپ کی مدد کرتا... لیکن میں صبح و شام آپ کی مظلومیت پر آنسو بہاتا ہوں، اور اگر میرے آنسو ختم ہو جائیں، تو میں آنسوؤں کی جگہ خون کے آنسو رووں گا۔"
क्या आप इसके डाउनलोड करने के स्रोतों के बारे में जानना चाहते हैं? क्योंकि यह दैवीय ज्ञान
ज़ियारत-ए-नाहिया के कुछ प्रमुख अंश (हिंदी अर्थ के साथ)
For Hindi speakers, the Ziyarat is often available in two formats: Hindi Transliteration (reading Arabic words in Hindi script) and Hindi Translation (understanding the meaning). 1. Example of Salutation (Hindi Transliteration):
ज़ियारत-ए-नाहिया की कुछ प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं: सलाम और सम्मान:
इस ज़ियारत का पाठ प्रारंभिक ज़ियारत संग्रहों में मिलता है, जैसे कि मुहम्मद इब्न जाफ़र अल-मश्हदी द्वारा रचित 'अल-मज़ार अल-कबीर' (al-Mazar al-Kabir) और अल-मुफ़ीद द्वारा रचित 'अल-मज़ार' (al-Mazar)। इमाम मेहदी (अ.स.) के इस पवित्र कथन के रूप में होने के कारण, यह ज़ियारत अत्यधिक महत्व रखती है, क्योंकि यह दैवीय ज्ञान, मार्गदर्शन और ऐतिहासिक तथ्यों से परिपूर्ण है।